सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और.
शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है. दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है
ज्यादा अपनापन दिखाने वाले लोग एक दिन बता देते है कि वो पराये है
गुरु बिन ज्ञान नहीं ज्ञान बिन आत्मा नहीं ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म सब गुरु की ही देन हैं शुभ गुरु पूर्णिमा